गुस्से से कैसे बचें सदगुरु
गुस्से से कैसे बचें सदगुरु
सदगुरु कहते हैं।
अगर आप कोयम्बटूर की सड़कों पर गाड़ी चला रहे हैं तो आपको सड़कों के बीच में बेतरतीब तरीकों से रखे डिवाइडर से बचना होता है आपको खराब ड्राइवरो से बचना होता है आपको सड़क पार करते पियक्कड़ों से ओर सड़क पार करते बच्चों से बचना होता है और कई चीजों से लेकिन जब आप कोयम्बटूर की सड़कों पर गाड़ी चलाते हैं तब क्या आपको चंद्रमा से बचना होता है? में आप से पूछ रहा हूँ नही क्योंकि चंद्रमा सड़क पर नही है हेना। तो इसी तरह क्या आप अभी गुस्सा है नहीं तो इससे बचने की क्या जरूरत है उससे बचने की कोई जरूरत नहीं है
दरअसल आपको लगता है गुस्सा एक हस्ति है गुस्सा कोई हस्ति नही है। आप गुस्सा होते हैं आप गुस्सा हो जाते हैं गुस्सा कही बैठा हुआ नहीं है ओर आप जाकर उससे टकरा जाते हैं ऐसा कुछ भी नहीं है आप गुस्सा होते है जब आप गुस्सा होते हैं ये आप के लिये अच्छा अनुभव है या बुरा अनुभव है बुरा अनुभव है दूसरों के लिए बेशक बुरा अनुभव है आप के लिए भी बुरा अनुभव है आज मेडिकल साइंस ने सिद्ध कर दिया है जब आप गुस्सा होते हैं तो आप वास्तव में अपने सिस्टम में ज़हर घोल रहे हैं पता है आपको हमे हमेशा से यह पता रहा है लेकिन आज ये केमिकल टेस्ट साफ़तौर पे आपको दिखा रहा है कि आप अपने सिस्टम में ज़हर घोल रहे हैं गुस्सा होकर आप अपने सिस्टम में ज़हर पैदा कर रहे है तो आप खुद को ही ज़हर क्यों देना चाहेंगे ये जानबूझकर नहीं हो रहा है आप खुद को ज़हर दे रहे है आप खुद के लिए बुरा अनुभव पैदा कर रहे है सिर्फ इसलिए क्योंकि आपका मन आपकी बात नहीं सुन रहा है ये आप से निर्देश नहीं ले रहा है अगर ये आप से निर्देश ले रहा होता तो आप उसे खुश रहने के लिए कहते आप गुस्सा करने के लिए नहीं कहते लेकिन अभी आप शान्त रहना चाहते हैं और ये गुस्सा हो रहा है क्योंकि ये आप से निर्देश नही ले रहा है तो अगर आप का मन आप से निर्देश नही ले रहा है तो आपको इसपर थोड़ा और ध्यान देना होगा ये आप से निर्देश क्यों नहीं ले रहा है अगर आप ये समझ लेते हैं तो आपको गुस्से से बचने की जरूरत नहीं है।क्योंकि ऐसा नही है कि गुस्सा कही पर बैठा है ओर आकर आप पर सवार हो जाता है आप गुस्सा हो रहे हैं आप दुखी हो रहे हैं आप ना खुश हो रहे हैं आपके साथ ये चीजें मूलरूप से इसलिये हो रही है क्योंकि आप ने अपने मन को काबू में रखने के लिए कुछ नहीं किया है ये संयोग से हो रहा है बस संयोग से अगर बाहरी हालात ठीक है तो आप भी ठीक है अगर बाहरी हालात खराब है तो आप भी खराब है।
इंसान के जीवन को ऐसा नहीं होना चाहिए इंसान के जीवन को ऐसा होना चाहिए अगर में ठीक हूँ तो मेरे आस पास भी सब कुछ ठीक हो जाता है यही वास्तविकता होनी चाहिए। अभी अगर मेरे आस पास के हालात जिसभी तरह के है में भी वैसा ही हो जाऊंगा नही नही मानव चेतना को परिस्थितियों का निर्माण करना चाहिए अभी परिस्थितिया मानव चेतना का निर्माण कर रही है यह इंसानी जीवन को ढालने का तरीका नहीं है।
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